पानी की है इतनी किल्लत तो कैसे धोएंगे हाथ, कैसे बचेंगे कोरोना वायरस से?
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How the Corona virus Crisis Highlights the Need for Clean Water

जब पूरी दुनिया कोविड-19 (COVID-19) नामक महामारी का सामना कर रही है, जो कि कोरोना वायरस (Corona Virus) के संक्रमण की वजह से हो रही है, ऐसे में इससे बचने का एक महत्वपूर्ण तरीका हाथों को अच्छी तरह से बार-बार धोते रहना है। लेकिन दुनिया एक बड़ा हिस्सा पानी की कमी की समस्या से जूझ रहा है।

दरअसल, 1980 के दशक के बाद से जनसंख्या वृद्धि, आर्थिक विकास और उपभोग के बदलते प्रारूप की वजह से दुनिया भर में पानी का उपयोग लगभग एक प्रतिशत सालाना बढ़ गया है। साथ में जलवायु परिवर्तन के साथ इसके अत्यधिक इस्तेमाल और प्रदूषण की वजह से भी जल आपूर्ति पर खतरा बढ़ गया है।

चेन्नई के हालात

याद कीजिए बीते साल चेन्नई की स्थिति को, जहां

  • निवासियों को टैंकर ट्रकों द्वारा वितरित किये जो रहे पानी के लिए कतार में लगना पड़ा था, क्योंकि शहर के अधिकतर जलाशय खाली हो गये थे।
  • जलवायु परिवर्तन की वजह से ऐसा सूखा पड़ा कि स्थानीय आपूर्ति ही पानी की एकदम ठप हो गई।
  • चेन्नई में करीब 7 मिलियन लोगों के घर हैं, जो अभी भी पानी की गंभीर कमी का सामना कर रहे हैं।
  • संभव है कि अगले कुछ वर्षों में यहां उपलब्ध भूजल समाप्त हो जाए।

मैक्सिको और मिशिगन का हाल

  • अब बात करते हैं ग्रामीण मैक्सिको की। यहां करीब पांच मिलियन लोगों की स्वच्छ पानी तक पहुंच ठीक से नहीं है।
  • महिलाओं और बच्चों को यहां पानी जमा करने में समय बिताना पड़ता है, जबकि इस समय को उन्हें स्कूल में बिताना चाहिए था या अन्य विकासपरक गतिविधियों में।
  • इसके अलावा यहां पुरुष तय करते हैं कि पानी के अधिकार का आवंटन किस तरह से किया जाए।
  • मिशिगन में बीते अगस्त में पानी की एक पाइपलाइन टूट गई थी, जिसके बाद से लोगों को पानी उबाल कर पीने की सलाह दी गई थी।
  • अब जब जाकर सीसे और स्टीन की पानी की पाइपलाइन बिछा दी गई है, तब जाकर इस सलाह को वापस लिया गया है।

विकासशील देशों की स्थिति

  • आज की तारीख में यदि अंटार्कटिका को छोड़ दें तो बाकी जितने भी महाद्वीप पर देश स्थित हैं, वहां के कई विकासशील देशों में कोरोना वायरस के बचाव के लिए हाथ धोना एक चुनौती बनी हुई है। साफ पानी की उपलब्धता यहां है ही नहीं।
  • बहुत से लोगों को साबुन ही नहीं मिल पाते हैं। जो लोग झुग्गी-झोपड़ियों में रह रहे हैं, उनके पास तो पानी होता ही नहीं है। वे कहां से बार-बार हाथ धोएंगे?

सिस्टम पर बढ़ता दबाव

  • संयुक्त राष्ट्र के अनुसार औद्योगिक, घरेलू और कृषि क्षेत्रों में पानी की बढ़ती मांग यह संकेत देती है कि लोग बेहतर भोजन व फाइबर और सार्वजनिक उपभोग के लिए ताजे पानी का खूब दोहन कर रहे हैं।
  • दुनिया में दो अरब से अधिक लोग ऐसे क्षेत्रों में रह रहे हैं, जहां पानी की समस्या सबसे विकट है। वहीं, 4 बिलियन लोग दुनिया के उन हिस्सों में रह रहे हैं, जहां साल में कम-से-कम एक महीना तो पानी की गंभीर कमी का सामना करना पड़ता है।
  • एक तो जल की मांग तेजी से बढ़ती जा रही है और दूसरा जलवायु परिवर्तन तेजी से हो रहा है। इसकी वजह से ही ऐसी स्थिति पैदा हुई है।
  • महिलाएं, जो परिवार के लिए जल का इंतजाम किसी तरह से करती हैं, उनके साथ भी दुव्र्यवहार देखने को मिलता है।

जरा अफ्रीका को देखें

  • केन्या की राजधानी नैरोबी में पाया गया है कि यहां की झुग्गी झोपड़ियों में जो परिवार रह रहे हैं उनके पास न तो नल है, जिनसे पानी आयेगा और न ही बिजली का कनेक्शन है कि मोटर लगाकर पानी जमीन के अंदर से निकाला जा सके।
  • यहां यदि संक्रमण फैल जाए तो बचना किसी का भी बहुत ही मुश्किल है। गरीबी इस कदर है कि साबुन खरीदना भी इनके लिए संभव है। ऐसे में आखिर कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए वे हाथ बार-बार कैसे धाएं?

उठाये गये कदमों का लाभ कहां?

  • भले ही पानी तक लोगों की पहुंच के लिए कई देशों द्वारा खूब पैसे खर्च किये जा रहे हैं और व्यवस्था का निजीकरण किया जा रहा है, मगर इससे इंजीनियरिंग फर्म तो समृद्ध हो रहे हैं, लेकिन स्वच्छ पानी अब तक यहां सपना ही बना हुआ है।
  • करीब 800 मिलियन लोग दुनिया में ऐसे हैं, जिनके पास स्वच्छता की कमी है।
  • खुले में शौच अब भी बहुत सी जगहों पर देखने को मिल रहे हैं। मानव अपशिष्ट सीधे नदियों में छोड़े जाने से ये दूषित हो रही हैं।
  • दुनियाभर में 80 फीसदी जो वेस्ट वाटर है, उसे ट्रीट नहीं किया जा रहा है।

अब तो कीजिए विचार

अब जब पानी की इतनी कमी है तो जरा सोचिए कि यदि कोरोना वायरस का संक्रमण और बढ़ता जाए, तो कितने भयावह हालात यहां पैदा हो जाएंगे। पर्यावरण संबंधी मुद्दों को जनता द्वारा गंभीरता से न लिया जाना कितना घातक साबित हो सकता है, ऐसी संकट की परिस्थितियों में जनता को शायद इसका एहसास हो सकता है। उम्मीद हम यही करें कि कोरोना वायरस का संक्रमण फैलना एक बार यदि बंद हो जाए तो आगे से हम सभी पर्यावरण संरक्षण के प्रति गंभीर हो जाएं।

अस्वीकरण (Disclaimer):

इस वेबसाइट पर प्रकाशित स्वास्थ्य संबंधी जानकारियां केवल सूचनात्मक उद्देश्य के लिए हैं और ये पेशेवर चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं हैं। यदि आप किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हैं या ऐसी किसी समस्या का आपको संदेह है, तो अपने पारिवारिक चिकित्सक या अन्य उपयुक्त चिकित्सक से परामर्श करें। यदि आप किसी हेल्थ इमरजेंसी का सामना कर रहे हैं या इसका आपको संदेह है, तो कृपया अपने नजदीकी अस्पताल के आपातकालीन विभाग में जाएं।



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