गर्भवती महिलाएं कोरोना वायरस से कैसे रहें महफूज? पढ़िए 5 महत्वपूर्ण सवालों के जवाब
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How to protect pregnant women from corona virus?

गर्भावस्था कभी-कभी बड़ी ही अनिश्चित और तनावपूर्ण स्थिति में पहुंच जाता है। विशेषकर एक महामारी फैल जाए तो चिंता और बढ़ जाती है। नये कोरोना वायरस का हमारे दैनिक जीवन पर प्रभाव किस-किस तरीके से पड़ रहा है, इसके बारे में अधिक जानकारी हासिल करने के लिए शोधकर्ताओं द्वारा तेजी से शोध किया जा रहा है।

जो महिलाएं अभी गर्भवती हैं, उनके मन में कोरोना वायरस को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। यहां हम आपको ऐसे ही पांच सवालों पर कोरोना से बचाव से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं।

सवाल नंबर 1 : यदि मैं गर्भवती हूं तो क्या मुझे और अधिक खतरा है?

  • इमोरी विश्वविद्यालय हेल्थकेयर (Emory University Healthcare) में स्त्री रोग और प्रसूति विभाग की अध्यक्ष डेनिस जैमीसन (Denise Jamieson) के मुताबक अच्छी खबर यह है कि इस प्रकार का अब तक कोई संकेत नहीं मिला है कि कोरोना वायरस से गर्भवती महिलाएं अधिक गंभीर रूप से प्रभावित होती हैं।
  • यह थोड़ा हैरान करने वाला जरूर है, क्योंकि जब 2003 में कोरोना वायरस के समान ही सार्स फैला था तो उस वक्त जितने मरीजों की मौत हुई थी, उनमें गर्भवती महिलाओं की संख्या 25 फीसदी तक थी।
  • द लांसेट के पिछले महीने के Online अंक में यह प्रकाशित किया गया है कि चीन के वुहान में तीसरे त्रिमस्टर में नौ गर्भवती महिलाएं कोरोना वायरस के संक्रमण का शिकार हो गई थीं, जिसकी वजह से उन्हें निमोनिया हो गया था। हालांकि, इनमें से कोई भी महिला गंभीर रूप से बीमारी नहीं पड़ीं और सभी ने स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया।
  • चीन में नेशनल क्लिनिकल रिसर्च सेंटर ऑफ ओब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी डिसीज (National Clinical Research Center of Obstetrics and Gynecology Disease) के निदेशक जी क्यूओ के हवाले से बताया गया है कि चीन में मिले वर्तमान सबूतों के अनुसार कोरोना वायरस की शिकार गर्भवती महिलाओं का भी क्लीनिकल परफाॅर्मेंस पूरी तरह से सामान्य वयस्क मरीजों की तरह ही रहा है।
  • भले ही गर्भावस्था के तीसरे त्रिमस्टर में कोरोना वायरस से पीड़ित महिलाओं में स्थिति गंभीर नहीं दिखी है, मगर पहले और दूसरे और त्रिमेस्टर में कोरोना वायरस से पीड़ित गर्भवती महिलाओं के बारे में जानकारी सामने नहीं आई है।

सवाल नंबर 2 : गर्भवती होने पर मुझे कौन सी अतिरिक्त सावधानियां बरतनी चाहिए?

जैमीसन के मुताबिक गर्भावस्था के दौरान शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली सामान्य अवस्था की तुलना में कमजोर होती है, जिसकी वजह से गर्भावस्था में महिलाओं के संक्रमण की चपेट में आने की आशंका बनी रहती है। यह संक्रमण उनमें भोजन के जरिये या फिर सांसों के जरिये भी पहुंच सकता है। ऐसे में यह जरूरी है कि

  • गर्भवती महिलाएं भीड़-भाड़ वाली जगहों से दूर रहें।
  • बीमार लोगों से दूरी बनाकर रखें।
  • बार-बार हाथ धोती रहें।
  • चेहरे को छूने से बचें।
  • सार्वजनिक जगहों पर न ही जाएं तो बेहतर होगा।
  • बाहर निकलते वक्त चेहरे पर मास्क जरूर पहनें।
  • टेलीमेडिसिन के बारे में अपने डॉक्टर से बात कर लें, ताकि अस्पताल अनावश्यक रूप से न आना पड़े।
  • केवल महत्वपूर्ण जांच के लिए डॉक्टर के पास जाएं।
  • डॉक्टर से ऑनलाइन परामर्श लेने का प्रयास करें।
  • एक बार ही हर काम कर लें। उदाहरण के लिए अल्ट्रासाउंड के लिए जा रही हैं, तो उसी दौरान जरूरी आवश्यक चेकअप भी हो जाए।

सवाल नंबर 3 : प्रसव के लिए मुझे किस तरह की आकस्मिक योजना बनानी चाहिए?

अधिकतर अस्पतालों ने आगंतुकों की संख्या को सीमित करना शुरू कर दिया है। ओरेगन हेल्थ एंड साइंस यूनिवर्सिटी में प्रसूति और स्त्री रोग की शिक्षा देने वाली राहेल पिलियोड कहती हैं कि यह निराश करने वाला जरूर है, क्योंकि बच्चे को जन्म देना एक शारीरिक प्रक्रिया से कहीं बढ़कर एक मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसका हिस्सा पूरा परिवार बनना चाहता है। हालांकि, जिस तरह की स्थिति है वैसे में बच्चे को जन्म देने का वक्त हो गया है तो

  • पहले से प्लान कर लेना चाहिए कि गर्भवती महिला के साथ अटेंडेंट के रूप में कौन रहेगा, क्योंकि अधिकतर अस्पताल इस संख्या को इस अवधि में एक तक सीमित कर रहे हैं।
  • यदि पार्टनर ही कोरोना वायरस को शिकार हो गया है और उसे खुद को सेल्फ आइसोलेट करना पड़ रहा है तो उसकी जगह कौन रहेगा, इसकी प्लानिंग पहले से ही कर लेना उचित होगा।
  • देखभाल करने के लिए किसी का भी चुनाव यह ध्यान में रखना चाहिए कि प्रसव के बाद महिला के साथ उसके बच्चे को विशेष देखभाल की जरूरत पड़ेगी।
  • कोशिश करें कि कोरोना वायरस के संक्रमण के प्रति बुजुर्गों को बेहद संवेदनशील देखते हुए किसी युवा व्यक्ति का ही इसके लिए चुनाव करें।

सवाल नंबर 4 : क्या होगा यदि मैं बीमार हो जाऊं – मैं अपने नवजात शिशु की रक्षा कैसे करूं?

  • यदि आप अपनी डिलीवरी की तारीख के वक्त बीमारी पड़ गई हैं और कोरोना वायरस के भी संक्रमण में होने की शंका है तो आपको विशेष तौर पर सतर्क हो जाने की आवश्यकता है। भले ही मां बनने जा रही महिला को ज्यादा खतरा न हो, लेकिन पूरा प्रयास किया जाना जरूरी है कि यह वायरस नवजात शिशु तक न पहुंच जाए।
  • शुरुआती शोध में तो यही पता चला है कि डिलीवरी के वक्त या फिर स्तनपान कराते वक्त कोरोना वायरस बच्चों के शरीर में प्रवेश नहीं करता, मगर यदि बच्चा किसी बीमारी व्यक्ति के नजदीक जाता है तो संभव है कि वायरस उसके शरीर में प्रवेश कर जाए।
  • बच्चे को संक्रमण से बचाने के लिए जहां अधिकतर देशों में डिलीवरी के बाद बच्चों को उसी कमरे में रखा जाता है, जहां मां होती है, लेकिन कोरोना वायरस का शिकार यदि मां हो गई है या फिर इसकी शंका है तो विशेषज्ञों के मुताबिक बच्चे को मां से अलग किसी दूसरे कमरे में आइसोलेशन में रखना चाहिए और उसकी देखभाल किसी स्वस्थ व्यक्ति द्वारा की जानी चाहिए।
  • बच्चे का अवलोकन करते रहना भी बहुत ही जरूरी है।
  • परिवार के जो लोग स्वस्थ है, वे आइसोलेशन में भी बच्चे के साथ समय बिता सकते हैं।
  • जन्म के तुरंत बाद यदि बच्चे को आइसोलेशन में रखा जा रहा है और मां अपने बच्चे को स्तनपान कराना चाहती है तो क्यूओ के मुताबिक ब्रेस्ट पंप का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, इसका पूरी तरह से स्वच्छ होना जरूरी है।

सवाल नंबर 5 : गर्भावस्था के दौरान बीमार होने पर मुझे और क्या जानने की आवश्यकता है?

  • जैमीसन का कहना है कि अनुसंधान चल रहा है, लेकिन वर्तमान में कोविड-19 के लिए एक निश्चित उपचार या टीका उपलब्ध नहीं है। एक बार यदि ये विकसित कर भी लिए गये तो इस बात की कम ही संभावना है कि वे गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान शुरू में उपयोग में लाने के लिए स्वीकृत किये जाएं।
  • इस बारे में विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि यदि मां को ऐसा लग रहा है कि वह कोरोना वायरस से संक्रमित किसी व्यक्ति के संपर्क में आ गई है तो उसे अपने शरीर के तापमान को माॅनिटर करते रहना चाहिए। साथ ही अपने श्वसन तंत्र का भी ध्यान रखना चाहिए। यदि उन्हें थोड़े से भी लक्षण कोरोना वायरस के नजर आते हैं तो तुरंत अपने डाॅक्टर से इसके बारे में बताना चाहिए और जांच करवानी चाहिए।
  • क्यूओ का कहना है कि इस दौरान दवाओं का भी चयन सावधानी से करने की जरूरत होती है, क्योंकि गर्भवती महिलाओं को कई तरह की दवाईयां देने की मनाही होती है। यहां तक कि खांसी-सर्दी और दर्द के साथ बुखार की भी दवाई।
  • फिलहाल सबसे बेहतर यही होगा कि गर्भवती महिलाएं पूरी तरह से सावधान रहें और अपना पूरा ख्याल रखें।

अस्वीकरण (Disclaimer):

इस वेबसाइट पर प्रकाशित स्वास्थ्य संबंधी जानकारियां केवल सूचनात्मक उद्देश्य के लिए हैं और ये पेशेवर चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं हैं। यदि आप किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हैं या ऐसी किसी समस्या का आपको संदेह है, तो अपने पारिवारिक चिकित्सक या अन्य उपयुक्त चिकित्सक से परामर्श करें। यदि आप किसी हेल्थ इमरजेंसी का सामना कर रहे हैं या इसका आपको संदेह है, तो कृपया अपने नजदीकी अस्पताल के आपातकालीन विभाग में जाएं।



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