जानिए, क्या संक्रमित मां से नवजात में पहुंच सकता है कोरोना वायरस?
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कोरोना क्विक अपडेट

  • स्वास्थ्य मंत्रालय के 14 मार्च 2021 के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में अभी कोरोना के 210544 एक्टिव केस हैं, 10989897 लोग ठीक हो चुके हैं और 158607 की मृत्यु हो चुकी है।
  • वेबसाइट वर्ल्डमीटर्स.इनफो के मुताबिक, भारत कोरोना से मृत्यु के मामले में अमेरिका, ब्राजील और मेक्सिको के बाद चौथे स्थान पर है।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के मुताबिक, कोरोना से पूरी दुनिया के 223 देशों और इलाकों में अब तक 118,754,336 लोग संक्रमित हुए हैं और 26,34,370 लोग दम तोड़ चुके हैं।
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Possible Vertical Transmission of SARS-CoV-2 or COVID-19 From an Infected Mother to Her Newborn

कोरोना वायरस (Corona virus) के बढ़ते संक्रमण के बीच इस सवाल का जवाब बहुत से लोग जानना चाह रहे हैं कि क्या कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से फैली बीमारी COVID-19 गर्भवती मां से जन्म से पहले नवजात में भी पहुंच सकता है? इसे लेकर द जर्नल ऑफ द अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन (The Journal of the American Medical Association – JAMA) में एक अध्ययन प्रकाशित किया गया है, जो बता रहा है कि ऐसा होने की कितनी आशंका है।

इस अध्ययन में 9 महिलाओं को शामिल किया गया है और इसमें पाया गया है कि किसी भी कोरोना वायरस से संक्रमित किसी भी गर्भवती महिला से उसके बच्चे में इसका संक्रमण नहीं पहुंचा।

कैसे किया अध्ययन?

  • चीन के वुहान में बीते 22 फरवरी को रेनमिन हाॅस्पिटल (Renmin Hospital) में कोविड-19 से संक्रमित एक गर्भवती महिला ने शिशु को जन्म दिया। इसकी जांच की गई। इस अध्ययन को वुहान विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूशनल रिव्यू बोर्ड की ओर से अपनी मंजूरी दे दी गई और लिखित तौर पर सहमति भी ले ली गई।
  • अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने मां से बातचीत की। उसके क्लिनिकल रिकाॅर्ड की जांच की। मां और बच्चे दोनों को इस दौरान चेस्ट कंप्यूटेड टोमोग्राफी (CT) नामक परीक्षण से गुजरना पड़ा।
  • चेन रिएक्शन की भी अध्ययनकर्ताओं ने जांच की। साथ ही खून में जैवरसायनिक परीक्षण भी किये गये।
  • डिलीवरी के दौरान मां के वैनिजल सेक्रेशन में RT-PCR टेस्टिंग भी की गई।

पाॅजीटिव के बीच एक निगेटिव रिपोर्ट

  • 28 जनवरी, 2020 को एक 29 साल की गर्भवती महिला, जिसके गर्भावस्था को 34 हफ्ते और दो दिन हुए थे, उसके कोरोना वायरस के संक्रमण की जद में होने का संदेह हुआ। उसके शरीर का तापमान 37.9 डिग्री सेल्सियस रिकाॅर्ड किया गया। उसे सांस लेने में भी तकलीफ हो रही थी।
  • RT-PCR के बाद यह महिला कोविड-19 की पाॅजीटिव पाई गई। इसके बाद 2 फरवरी को यह महिला रेनमिन हाॅस्पिटल में भर्ती हुई।
  • उसे एंटी वायरल, एंटी बायोटिक, कोर्टिकोस्टाॅइड और ऑक्सीजन थेरेपी दी गई। चार बार आरटी-पीसीआर टेस्ट हुआ और इसका परिणाम पाॅजीटिव आया।
  • 21 फरवरी को मरीज के वैजिनल सेक्रेशन का आरटी-पीसीआर टेस्ट हुआ तो इसका परिणाम निगेटिव आया।

बच्ची में नहीं मिला संक्रमण

  • फिर 22 फरवरी को इस महिला ने एक बच्ची को जन्म दिया। डिलीवरी के दौरान मां ने एन95 मास्क पहना हुआ था। मां ने नवजात बच्ची को छुआ भी नहीं। बच्ची का वजन 3120 ग्राम था। उसमें कोरोना वायरस के संक्रमण के कोई लक्षण नहीं थे।
  • बच्ची को तुरंत क्वारंटाइन कर दिया गया। उसे नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट में डाल दिया गया। दो घंटे बाद भी बच्चे में सबकुछ सामान्य रहा। उसका सीटी भी एकदम सामान्य रहा। इसके बाद बच्ची को प्रोटोकाॅल के मुताबिक बच्चों के अस्पताल में रेफर कर दिया गया।
  • इस बच्ची के 2 घंटे की उम्र से 16 दिनों की उम्र तक आरटी-पीसीआर टेस्ट हुई और हर बार बच्ची के टेस्ट का रिजल्ट निगेटिव आया। आखिरकार उसे 18 मार्च को हाॅस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया गया।
  • मां के दूध का 28 फरवरी को आरटी-पीसीआर टेस्ट किया गया और इसका रिजल्ट निगेटिव आया। आखिरकार यह साफ हो गया कि कोरोना वायरस से संक्रमित मां का संक्रमण बच्ची में नहीं पहुंचा।

अस्वीकरण (Disclaimer):

इस वेबसाइट पर प्रकाशित स्वास्थ्य संबंधी जानकारियां केवल सूचनात्मक उद्देश्य के लिए हैं और ये पेशेवर चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं हैं। यदि आप किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हैं या ऐसी किसी समस्या का आपको संदेह है, तो अपने पारिवारिक चिकित्सक या अन्य उपयुक्त चिकित्सक से परामर्श करें। यदि आप किसी हेल्थ इमरजेंसी का सामना कर रहे हैं या इसका आपको संदेह है, तो कृपया अपने नजदीकी अस्पताल के आपातकालीन विभाग में जाएं।



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