कोरोना महामारी के दौरान ऐसे रखें अपने बच्चों का ख्याल
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Tips for parenting during the corona virus outbreak according to UNICEF

कोरोना वायरस (Coronavirus) के संक्रमण से होने वाली बीमारी COVID-19 की वजह से पारिवारिक जीवन दुनिया भर में इस वक्त कैद हो गया है। स्कूल बंद चल रहे हैं। काम घर से हो रहे हैं। शारीरिक तौर पर लोग एक-दूसरे से दूर हैं। बाकी लोगों के लिए यह भले ही ज्यादा चुनौतीपूर्ण न हो, मगर पैरेंट्स के लिए यह वक्त बेहद चुनौती भरा है, क्योंकि इस लाॅकडाउन के दौरान घर में बच्चों को संभालना आसान काम नहीं है।

ऐसे में हम आपको यहां बता रहे हैं कि यूनिसेफ के अनुसार पैरेंट्स को इस वक्त क्या करना चाहिए?

बच्चों को वक्त दें (One-on-one time)

  • अपने बच्चों के साथ वक्त बिताएं। कम-से-कम 20 मिनट पूरी तरह से उन्हें समर्पित जरूर करें।
  • बच्चों से जानें कि वे क्या करना चाहते हैं। उनका आत्मविश्वास बढ़ाएं।
  • छोटे बच्चे हैं तो उनके चेहरे पर उभरने वाले भावों की नकर करें और आवाज निकालें। उनके सामने गाना गाएं। बर्तन, डिब्बे या चम्मच से आवाज निकालें। कहानी सुनाएं उन्हें। किताब पढ़कर सुनाएं। उन्हें फोटो दिखाएं।
  • बच्चे थोड़े बड़े हैं तो उनके सामने किताब पढ़ें और किताब की पिक्चर उन्हें दिखाएं। घर में उनके साथ टहलें। म्यूजिक पर डांस करें और गाना गाएं। साथ में उनके गाएं। उनके साथ मिलकर सफाई करें। उनके साथ मिलकर कुकिंग करें। स्कूल वर्क भी उन्हें कराएं।
  • बच्चे किशोरावस्था में हैं तो उनकी रुचि के मुताबिक खेल, संगीत, दोस्त, सेलिब्रिटीज आदि के बारे में बातें करें। घर के अंदर उनके साथ टहलें। उनके साथ एक्सरसाइज करें और उनके पंसदीदा संगीत को भी सुनें।
  • टीवी और फोन से दूर रहें और अपने बच्चों को सुनें। उन पर पूरा ध्यान दें और मस्ती करें।

सकारात्मक बनाकर रखें घर का माहौल (Keeping it positive)

  • बच्चों को किसी चीज के लिए निर्देशित करते वक्त अपने शब्दों का चयन सकारात्मक रखें। यह कहने की बजाय कि कपड़ों को फैलाकर रख दिया है तुमने, यह कहें कि प्लीज अपने कपड़ों को अच्छी तरह से समेट कर रख दो।
  • अपने बच्चों पर चिल्लाने से न केवल बच्चे, बल्कि आप पर भी स्ट्रेस बढ़ेगा। बेहतर होगा कि बच्चों का नाम लेकर उनका ध्यान खींचें और आराम से धीमी आवाज में बातें करें।
  • बच्चे जब कुछ अच्छा करें तो उनकी तारीफ करना न भूलें। वे दिखाएंगे नहीं, लेकिन इससे बार-बार वे अच्छी चीजें करने की कोशिश करेंगे। वे इससे श्योर हो जाते हैं कि आप उनकी चीजों को नोटिस कर रहे हैं और उनकी परवाह भी कर रहे हैं।
  • बच्चों को दिनभर घर में चुप रखना आसान नहीं है, लेकिन उनके साथ अच्छी तरह से पेश आने पर कम-से-कम कुछ मिनट तक यदि आप फोन पर हैं, तो वे शांत जरूर रहेंगे।
  • किशोरावस्था में बच्चे अपने दोस्तों से जुड़कर रहना पसंद करते हैं। ऐसे में आप सोशल मीडिया के जरिये सोशल डिस्टेंसिंग के सुरक्षित तरीकों से अपने दोस्तों से जुड़े रहने में मदद करें। आप भी उनके साथ दोस्ताना रहकर मस्ती कर सकते हैं।

रूपरेखा तैयार करके काम करें (Get structured)

  • कुछ गतिविधियों की रूपरेखा अपने और अपने बच्चों के लिए तैयार कर लें। इसके अनुसार काम करने से बच्चों को भी महसूस होगा कि वे कुछ अच्छा कर रहे हैं और वे अच्छी तरह से बिहेव करेंगे।
  • दिन का रूटीन बनाने में बच्चे और किशोर अधिक मदद कर सकते हैं जैसे कि वे स्कूल के टाइम टेबल के मुताबिक चलते हैं। वे इसका पालन भी ज्यादा अच्छी तरह से करेंगे।
  • एक्सरसाइज को नियमित दिनचर्या में शामिल कर लें। इससे बच्चों पर स्ट्रेस नहीं बढ़ेगा। साथ ही उनमें ऊर्जा का संचार होता रहेगा।
  • अपने बच्चों को सोशल डिस्टेंसिंग का महत्व बताते हुए उन्हें चिट्ठी लिखने व ड्राइंग करने और छत पर जाकर या घर के दरवाजे पर खड़े होकर लोगों को दिखाने या सोशल मीडिया के जरिये शेयर करने के लिए प्रोत्साहित करें।
  • बच्चों की सलाह को सुनें और उन्हें गंभीरता से लें।
  • हैंडवाॅश के लिए 20 सेकेंड का गाना बनाकर इसे फन बना दें। नियमित रूप से हैंडवाॅश करने के लिए बच्चों को प्वाइंट दे सकते हैं और उनकी प्रशंसा भी कर सकते हैं।
  • कितनी कम बार अपने चेहरे को टच करते हैं, इस तरह का गेम खेलकर सबसे कम बार चेहरे को टच करने के लिए कुछ उपहार दे सकते हैं या उनकी प्रशंसा की जा सकती है।
  • चूंकि अपने बच्चों के लिए आप ही माॅडल हैं। इसलिए अपने आचरण को अच्छा रखेंगे तो बच्चे भी इससे सीख लेकर आपका अनुसरण करेंगे।

खराब आचरण को करें नियंत्रित (Control Bad behaviour)

  • बच्चे घर में कई बार बदमाशी करते हैं, लेकिन जल्दी उनकी गलती को पकड़कर उन्हें समझाकर उन्हें अच्छी हरकतें करने के लिए प्रोत्साहित करें। उनके शुरू करने से पहले ही उन्हें रोक दें। उनका ध्यान हटा दें। उदाहरण के लिए उन्हें आप कह सकते हैं कि चलो गाना सुनते हैं या डांस करते हैं।
  • बच्चों की हरकतों पर गुस्सा जाए तो खुद को 10 सेकेंड के लिए रोकें। पांच बार सांस अंदर लें और छोड़ें। फिर शांत होकर प्रतिक्रिया दें। लाखों पैरेंट्स ने इस तरीके को अपनाया है और यूनिसेफ के मुताबिक उन्हें इसका लाभ मिला है।
  • बच्चों को किसी भी चीज का नतीजा बताते चलें, लेकिन शांत होकर। वे उसे मानें तो उनकी प्रशंस करें। इससे वे हमेशा इनका ध्यान रखेंगे।

शांत रहें और स्ट्रेस को ठीक से नियंत्रित करें (Keep calm and manage stress)

  • खुद को अकेला न समझें। बच्चों की जरूरतों को लेकर और उन्हें हैंडल करने को लेकर किसी करीबी की सलाह ले लें।
  • ब्रेक चाहिए होता है। ऐसे में बच्चे सो जाएं तो कुछ मस्ती आप भी कर लें। जैसे कि खुद को रिलैक्स करें। गाना सुन लें। किसी से फोन पर बात कर लें। चैट कर लें।
  • बच्चे जो बताना चाहें, उन्हें जरूर सुनें। उनकी फीलिंग्स को समझें। उनका सम्मान करें। उनका मार्गदर्शन करें।

अस्वीकरण (Disclaimer):

इस वेबसाइट पर प्रकाशित स्वास्थ्य संबंधी जानकारियां केवल सूचनात्मक उद्देश्य के लिए हैं और ये पेशेवर चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं हैं। यदि आप किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हैं या ऐसी किसी समस्या का आपको संदेह है, तो अपने पारिवारिक चिकित्सक या अन्य उपयुक्त चिकित्सक से परामर्श करें। यदि आप किसी हेल्थ इमरजेंसी का सामना कर रहे हैं या इसका आपको संदेह है, तो कृपया अपने नजदीकी अस्पताल के आपातकालीन विभाग में जाएं।



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