सोराइसिस में बहुत काम आएंगे ये 11 घरेलू नुस्खे और सावधानियां
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Top 11 Home Remedies and Precautions for Psoriasis

सोराइसिस (Psoriasis) त्वचा (skin) से जुड़ी एक ऐसी बीमारी है, जो त्वचा की कोशिकाओं के अधिक बढ़ जाने की वजह से होती है। यहां हम आपको सोराइसिस के कारण, लक्षण और टॉप 11 घरेलू उपचारों और कुछ सावधानियों के बारे में बता रहे हैं। इस पूरे लेख को ध्यान से पढ़िए।

सोराइसिस क्या है? (What is psoriasis?)

ये कोशिकाएं (cells) त्वचा के नीचे से बढ़नी शुरू होती हैं और धीरे-धीरे त्वचा की पूरी परत को घेर लेती हैं। जब कोशिकाएं विकसित हो जाती हैं तो इनकी वजह से नमी (moisture) भी खत्म होने लगती है। त्वचा की परत रूखी हो जाती है। इसके बाद इस परत पर सूजन (swelling) आने लगती है। लालिमा (redness) की कमी हो जाती है। जलन महसूस होने लगती है। इनकी पूरी प्रक्रिया करीब एक महीना तक चलती है। देखने में सोराइसिस एकदम मोटे और लाल चकते की तरह नजर आते हैं। कभी-कभी इन चकतों में दरारें भी दिखनी शुरू हो जाती हैं और इनमें से खून का रिसाव भी होने लगता है।

सबसे पहले जान लेते हैं कि आखिर सोराइसिस होने के कारण क्या हैं? (Reasons behind Psoriasis)

  • सोराइसिस के कारणों का पता तो अब तक नहीं लगाया जा सका है, मगर माना जाता है कि यह हमारे शरीर में टी कोशिकाओं (T-cells) और अन्य श्वेत रक्त कोशिकाओं के साथ प्रतिरक्षा प्रणाली के ठीक से तालमेल नहीं होने की वजह से होता है। इसे न्यूट्रोफिलिक कहते हैं।
  • बाहर से जो वायरस (virus) और बैक्टीरिया (bacteria) शरीर में प्रवेश करते हैं, उनसे टी कोशिकाएं बचाव करती हैं। जब आप सोराइसिस से पीड़ित हो जाते हैं, तो यही टी-कोशिकाएं आपकी त्वचा पर प्रहार करना शुरू कर देती हैं। इससे त्वचा पर चकते पड़ने शुरू हो जाती हैं।
  • हालांकि सोराइसिस के लिए केवल टी-कोशिकाओं की ही जिम्मेवार नहीं ठहराया जा सकता।
  • आनुवंशिक और पर्यावरण से जुड़े कई कारक भी इसके लिए जिम्मेवार होते हैं।
  • इसके अन्य कारणों में यदि आप गले (throat) के अलावा त्वचा के संक्रमण (infection) के पीड़ित हैं तो संभव है कि यह सोराइसिस का कारण बन जाए।
  • इसके अतिरिक्त त्वचा पर कोई घाव जैसे कि मधुमक्खी का काट लेना, त्वचा का कट जाना या फिर धूप में त्वचा का झुलस जाना भी इसे जन्म दे सकता है।
  • सोराइसिस की चपेट में आने का एक और कारण तनाव पालना (stress), धूम्रपान करना (smoking) और शराब (drinking) का अधिक सेवन करना भी है।
  • शरीर में विटामिन ए कम होने पर एवं उच्च रक्तचाप (high blood pressure) के लिए कुछ दवाईयां खाने की वजह से भी सोराइसिस की बीमारी हो जाती है।
  • यदि आपके घर में पहले से कोई सदस्य इस बीमारी से पीड़ित है तो आपको भी यह बीमारी हो सकती है।

आइए अब आपको सोराइसिस के मुख्य लक्षणों के बारे में बताते हैं (Symptoms of Psoriasis)

  • ये हरेक व्यक्ति में अलग-अलग तरीके के नजर आते हैं। ये इस बात पर भी निर्भर करते हैं कि उसे किस तरह का सोराइसिस है।
  • सोराइसिस त्वचा के दरअसल एक बहुत ही छोटे हिस्से को घेरता है। जैसे कि सिर या कोहनी या फिर शरीर का कोई और हिस्सा।
  • सोराइसिस होने पर त्वचा पर सूजन तो आता ही है, साथ ही लाल चकते भी दिखने लगते हैं।
  • इन पर पपड़ी की तरह दिखने वाली मृत त्वचा (dead skin) बन जाती है। यह त्वचा रुखी हो जाती है। इनमें दरारें पड़नी शुरू हो जाती हैं। यह दर्द देता है। कभी-कभी इससे खून भी बहता है।
  • हालांकि, यह बिल्कुल भी जरूरी नहीं कि जो कोई भी सोराइसिस से पीड़ित है, उसमें केवल इन्हीं में से कोई लक्षण नजर आए। इससे पीड़ित व्यक्ति में केवल कुछ दिन या कुछ हफ्तों के लिए ही ये लक्षण नजर आते हैं। फिर ये गायब हो जाते हैं और इन्हें पहचानना मुश्किल हो जाता है। हालांकि, कुछ दिनों के बाद दोबारा ये लक्षण दिखने लगते हैं।
  • यदि इस बीमारी के लक्षण साफ तरीके से पहचान में नहीं आते हैं तो डाॅक्टर मरीज की त्वचा का सैंपल (sample) लेते हैं और इसकी जांच करते हैं। इसे बायप्सी कहते हैं।

आइए अब जानते हैं सोराइसिस के टॉप 11 घरेलू उपचारों और सावधानियों के बारे में (Top 11 Home Remedies and Precautions for Psoriasis)

सोराइसिस वास्तव में गंभीर बीमारी की श्रेणी में आता है, मगर कुछ घरेलू उपचार (home remedies), सावधानियां (precautions) और खान-पान में परहेज करने से इस बीमारी में बहुत हद तक राहत मिल सकती है।

(1) त्वचा से संबंधित बीमारियों में हल्दी बड़ी ही लाभकारी होती है। सोराइसिस की वजह से त्वचा में सूजन आती है, हल्दी उसे कम कर देती है। आप चाहें तो हल्दी (turmeric) का सेवन खाने में कर सकते हैं। या फिर इसकी गोली बनाकर भी ले सकते हैं। इसका सेवन करने से पहले हालांकि आपको एक बार डाॅक्टर से बात कर लेनी चाहिए। ऐसी मान्यता है कि यदि आप रोजाना डेढ़ से तीन ग्राम हल्दी का सेवन करते हैं, तो इससे सोराइसिस से बहुत हद तक बचाव होता है।

(2) यदि आप सोराइसिस की चपेट में आ गये हैं तो आपको संतुलित आहार (balanced diet) जैसे कि अलसी, हरी सब्जियां, साबुत अनाज, नमकीन पानी की मछली, फल आदि का सेवन करना चाहिए।

(3) कुछ चीजों जैसे कि वनस्पति तेल, वसायुक्त आहार, दूध और उसके उत्पाद, मिठाइयां, चाय व काॅफी एवं शराब से परहेज करना बहुत ही जरूरी है।

(4) रोज स्नान करना सोराइसिस में जरूरी है। माॅश्चराइजर क्रीम और लोशन आदि लगा सकते हैं।

(5) शरीर का जो हिस्सा सोराइसिस की चपेट में है, रात में उसे ढंक कर रखना चाहिए।

(6) थोड़ी धूप लेनी जरूरी है, मगर सोराइसिस जिस जगह पर है, वहां सूर्य की ज्यादा रोशनी नहीं पड़नी चाहिए।

(7) साथ ही आपको अपनी त्वचा को नम बनाये रखना चाहिए।

(8) सोराइसिस से बचाव के लिए गंध या इत्र आदि से दूर रहना श्रेयस्कर होता है। इन दिनों अधिकतर परफ्यूम (perfumes), साबुन (soaps) और डाइ आदि में जलन पैदा करने वाले केमिकल होते हैं। खुशबू तो इनकी बहुत अच्छी होती है, मगर ये सोराइसिस को और बढ़ा देते हैं। यदि आपकी त्वचा संवेदनशील है तो आपको तो बिल्कुल भी इन उत्पादों को इस्तेमाल में नहीं लाना चाहिए।

(9) सोराइसिस होने पर आपको हल्का व्यायाम करने के साथ उचित आहार लेकर वजन (weight) को संतुलित रखने की कोशिश करनी चाहिए।

(10) योग (Yoga) और ध्यान (meditation) आदि करने से भी इसमें लाभ मिलता है।

(11) यह बात भी ध्यान देने योग्य है कि यह बिल्कुल भी जरूरी नहीं कि सोराइसिस के लक्षण आपको शरीर में ही दिखें। कुछ बाहरी वजहें भी इसके लिए जिम्मेवार हो सकती हैं। उदाहरण के लिए तनाव। तनाव सोराइसिस की एक प्रमुख वजह है। तनाव सोराइसिस को अत्यंत गंभीर बना सकता है। इसलिए जितना हो सके, तनाव से बचने की कोशिश करनी चाहिए।

कहने को तो सोराइसिस एक त्वचा से संबंधित बीमारी है, लेकिन यदि समय रहते इसका इलाज नहीं किया जाए तो यह गंभीर बीमारी में तब्दील हो जाता है। सोराइसिस धीरे-धीरे शरीर के किसी भी हिस्से में पनप जाता है। यह बहुत कष्ट देता है। सोराइसिस हो जाने पर यदि यहां बताये हुए घरेलू इलाज किये जाएं और परहेज रखा जाए तो संभव है कि यह पूरी तरह से ठीक भी हो जाए।

अस्वीकरण (Disclaimer):

इस वेबसाइट पर प्रकाशित स्वास्थ्य संबंधी जानकारियां केवल सूचनात्मक उद्देश्य के लिए हैं और ये पेशेवर चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं हैं। यदि आप किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हैं या ऐसी किसी समस्या का आपको संदेह है, तो अपने पारिवारिक चिकित्सक या अन्य उपयुक्त चिकित्सक से परामर्श करें। यदि आप किसी हेल्थ इमरजेंसी का सामना कर रहे हैं या इसका आपको संदेह है, तो कृपया अपने नजदीकी अस्पताल के आपातकालीन विभाग में जाएं।



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