जानिए काली खांसी के कारण, लक्षण और 6 असरदार घरेलू इलाज
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Whooping Cough, Causes, Symptoms and Top 6 Home Remedies

बदलते मौसम का प्रभाव शरीर पर पड़ने से अक्सर सर्दी हो जाती है और जुकाम के साथ खांसी भी होने लगती है। यह खांसी कई बार लंबे समय तक रह जाती है। ऐसे में यदि खांसते समय आपको दर्द महसूस हो या फिर कुछ अलग तरह की इस दौरान आवाज आये तो संभव है कि आप काली खांसी की चपेट में आ गये हैं। इसे ठीक न किया जाए तो यह आगे चलकर गंभीर समस्या बन सकती है। ऐसे में इस लेख में हम आपको काली खांसी से जुड़ी हर महत्वपूर्ण बात और इसके इलाज तक के बारे में बता रहे हैं, जो आपके लिए बड़ी मददगार साबित होगी।

काली खांसी को जानें (What is Whooping Cough)

  • जीवाणुओं के संक्रमण की चपेट में आने की वजह से यह होता है।
  • सांस लेने में इससे समस्या होने लगती है।
  • इसे पर्टसुसिस और वूपिंग कफ भी कहते हैं।
  • कोई भी काली खांसी का शिकार हो सकता है, मगर विशेष तौर पर नवजातों और बच्चों को इसका खतरा अधिक होता है।
  • इसे ही कुकर खांसी के नाम से भी जानते हैं।

काली खांसी के तीन चरण (Three stages of Whooping Cough)

  • पहला चरण कैटर्रल (Catarrhal) के नाम से जाना जाता है, जो सामान्यतः एक से दो हफ्ते तक रहता है। इसमें नाक बहना, छींक आना, हल्का बुखार होना जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं। खांसी शुरू में कम, लेकिन बाद में बढ़ जाती है।
  • दूसरे चरण को पेरोक्सिमल (Paroxysmal) के नाम से जानते हैं, जो एक से दो महीने तक रहता है। इसमें खांसी बढ़ती भी है और साथ में आवाज भी आती है। उल्टी के साथ अधिक थकावट जैसी परेशानियां भी होने लगती हैं।
  • तीसरे चरण को कान्वलेसंट (Convalescent) कहते हैं, जो सात से 20 दिनों तक रहता है। इसे ठीक होने वाला चरण भी कहते हैं, क्योंकि इसमें बीमारी में सुधार होने लगता है।

काली खांसी की वजह (Causes of Whooping Cough)

  • बोर्डेटेला पर्टुसिस (Bordetella Pertussis) नामक बैक्टीरिया के संक्रमण की वजह से यह बीमारी होती है।
  • शरीर में इसकी वजह से जहर घुलने लगता है।
  • इसकी वजह से सिलिया, जो कि रेस्पिरेटरी सिस्टम का ही एक भाग है, इसमें दिक्कत आने लगती है, जिसके कारण नाक की नली सूज जाती है।

काली खांसी को ऐसे पहचानें (Symptoms of Whooping cough)

  • नाक बहने लगती है।
  • खांसी होती है।
  • बुखार हल्का आता है।
  • थकावट लगती है।
  • खांसी के दौरान आवाज आती है।
  • निमोनिया हो जाता है।
  • आंखों में दर्द होता है और इसमें पानी भर जाता है। आंखें लाल भी दिखती हैं।
  • हर्निया बढ़ जाता है।
  • खांसते वक्त या इसके बाद उल्टी हो जाती है।
  • बच्चों में एपनिया की समस्या होती है। इसका मतलब यह हुआ कि सांस लेते वक्त ठहराव आने लगता है।
  • नाक के साथ आंखों और मस्तिष्क में खून का स्राव होने लगता है।
  • सर्दी होती है और तीन से सात दिनों में सूखी खांसी भी होने लगती है।
  • कुछ शिशु खांसते नहीं है, लेकिन सांस लेने में उन्हें दिक्कत होती है और शरीर का रंग भी उनका नीला पड़ने लगता है।

काली खांसी के खतरे (Whooping cough Risks)

बच्चों में

  • सांस लेने की क्षमता घट सकती है।
  • कोई दिमागी बीमारी हो सकती है।
  • निमोनिया होने की आशंका रहती है।
  • सांस धीमे चलने लगती है।

व्यस्कों में

  • वजन घट सकता है।
  • बेहोशी आ सकती है।
  • रिब फ्रैक्चर हो सकता है।
  • मूत्राशय पर नियंत्रण नहीं रहता है।

काली खांसी से ऐसे बचें (Prevention Tips for Whooping cough)

  • इससे संबंधित टीका जरूर लगवा लें।
  • बच्चों को टीका जरूर लगवाएं। साथ ही किसी को खाली खांसी है तो बच्चों को उससे दूर रखें।
  • स्वच्छता बनाये रखें, जिससे कि बैक्टीरिया को पनपने का मौका न मिले।
  • बीमारी को लेकर जागरूक बनें।

काली खांसी को ठीक करने के टॉप 6 घरेलू उपचार (Home Remedies for Whooping cough)

(1) अदरक से काली खांसी का इलाज

  • अदरक के एक-दो छोटे टुकड़े का पेस्ट बना लेना है और इससे निकले रस का सेवन रोजाना करना है।
  • स्वाद ठीक न लग रहा हो तो इसमें आधा चम्मच शहद मिला सकते हैं।
  • एंटीबैक्टीरियल गुणों से अदरक के भरपूर होने और ग्राम-नेगेटिव बैक्टीरिया (Gram-negative bacteria) से लड़ने की इसकी क्षमता की वजह से काली खांसी को कम करने में यह बड़ा प्रभावी साबित होता है।

(2) तुलसी के पत्ते से काली खांसी का इलाज

  • औषधीय गुण तुलसी के पत्ते में भरे पड़े हैं। इसमें एंटीप्रोटोजोअल, एंटीफंगल और एंटीवायरल गुण होने से सर्दी-जुकाम से लड़ने के लिए इसका इस्तेमाल प्राचीन काल से ही होता चला आ रहा है।
  • काली खांसी में इसके इस्तेमाल से इलाज करने के लिए कुछ तुलसी के पत्ते और काली मिर्च के कुछ दानों को पीसकर शहद के साथ उसका पेस्ट बनाकर उससे छोटी-छोटी गोलियां बना लेनी हैं और चार बार दिन में इसका सेवन करीब एक महीने तक करना है। इससे आराम मिल जायेगा।

(3) बादाम से काली खांसी का उपचार

  • पॉलीफेनोल्स जीवाणुरोधी गुण बादाम के छिलके में मौजूद होने की वजह से काली खांसी के कारण शरीर में पैदा हुए ग्राम-नेगेटिव बैक्टीरिया (Gram-negative bacteria) पर यह करारा प्रहार करके खाली खांसी के प्रभाव को कम कर देता है।
  • इसके लिए आपको 6 से 7 बादाम को पानी में रात में भींगने के लिए डाल देना है और अगले दिन आधा चम्मच मक्खन के साथ मिलाकर इसे पीस लेना है। खांसी ठीक होने तक इसे पीते रहें। लाभ मिल जायेगा।

(4) लहसुन से काली खांसी का उपचार

  • एंटीबैक्टीरियल गुणों से परिपूर्ण एलिसिन (allicin) कंपाउंड की मौजूदगी लहसुन में होती है, जो काली खांसी के बैक्टीरिया से असरदार तरीके से लड़ती है।
  • इसके लिए आपको लहसुन की तीन से चार कलियां लेकर इन्हें कूच कर इनका रस निकाल लेना है और इसका सेवन काली खांसी के ठीक होने तक करना है। जल्द ही आपको आराम मिल जायेगा।
  • स्वाद ठीक न लगे तो इसमें आप थोड़ा शहद भी मिला सकते हैं।

(5) हल्दी से काली खांसी का उपचार

  • एंटीबैक्टीरियल गुणों की वजह से सर्दी-जुकाम से लेकर खांसी और सांस से संबंधित कई समस्याओं के इलाज में हल्दी का इस्तेमाल होता है। काली खांसी में भी यह बड़ा कारगर साबित होता है।
  • इसके लिए आपको एक गिलास गर्म दूध में एक चम्मच हल्दी मिलाकर एक सप्ताह तक या फिर खांसी के ठीक न होने तक पीना है।

(6) प्याज से काली खांसी का उपचार

  • एंटीबायोटिक गुण प्याज में होते हैं, जिसकी वजह से प्याज का इस्तेमाल में काली खांसी के इलाज में किया जा सकता है। दरअसल भून हुए प्याज का सेवन यदि आप शहद के साथ करते हैं तो इससे न केवल खांसी ठीक होती है, बल्कि बलगम भी बाहर निकल आता है।
  • एक प्याज लेकर आपको उसे काटकर भून लेना है और शहद के साथ खाना है। आप चाहें तो प्याज का रस भी निकाल कर थोडे शहद के साथ पी सकते हैं। कुछ घंटों में आपको इसे पीते रहना है। इससे बहुत राहत मिल जायेगी।

अस्वीकरण (Disclaimer):

इस वेबसाइट पर प्रकाशित स्वास्थ्य संबंधी जानकारियां केवल सूचनात्मक उद्देश्य के लिए हैं और ये पेशेवर चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं हैं। यदि आप किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हैं या ऐसी किसी समस्या का आपको संदेह है, तो अपने पारिवारिक चिकित्सक या अन्य उपयुक्त चिकित्सक से परामर्श करें। यदि आप किसी हेल्थ इमरजेंसी का सामना कर रहे हैं या इसका आपको संदेह है, तो कृपया अपने नजदीकी अस्पताल के आपातकालीन विभाग में जाएं।



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