बवासीर से लेकर कुष्ठ रोग तक का रामबाण इलाज है कनेर का फूल
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Oleander extract benefits and side effects in Hindi

इस लेख को शुरू से लेकर अंत तक ध्यान से पढ़ें, क्योंकि कनेर जितना फायदेमंद है, उतना ही नुकसानदेह भी, जिसके कारण बिना सोचे-समझे इसका प्रयोग करना घातक भी हो सकता है। इसलिए इस लेख में हम आपको कनेर के फायदे और नुकसान दोनों के बारे में आपको बता रहे हैं, जिसे ठीक से समझकर ही इसका प्रयोग करें।

कनेर का वैज्ञानिक नाम

कनेर को अंग्रेजी में ओलियंडर (Oleander) कहते हैं और इसका वैज्ञानिक नाम Nerium oleander है। कनेर के फूल बेहद खूबसूरत होते हैं। इनमें कनेर के सफेद फूल और कनेर का पीला फूल तो काफी मनमोहक होता है। यह मुख्य रूप से ऊपरी गंगा के मैदानों में मिलता है।

कनेर कितने प्रकार के होते हैं?

मुख्य रूप से इसकी चार प्रजातियां होती है, जिनमें क्रमशः सफेद, पीले, लाल और गुलाबी फूल लगते हैं। इनमें पीले और सफेद कनेर के ढेर सारे औषधीय उपयोग भी होते हैं।

कनेर के औषधीय गुण और कनेर के औषधि प्रयोग

यहां हम आपको कनेर के औषधि प्रयोग के टॉप 5 घरेलू नुस्खे बता रहे हैं।

(1) दाद की दवा है कनेर

दाद (Ringworm) की समस्या है तो कनेर की जड़ को पानी के साथ मिला लेना चाहिए और दाद पर वैसे ही इसका लेप करना चाहिए जैसे कि चंदन (Sandalwood) का करते हैं। एक सप्ताह यदि ऐसा करेंगे तो दाद पूरी तरह से मिट जायेगा।

(2) कनेर से हो सकता है कुष्ठ रोग का इलाज

कुष्ठ रोग (leprosy) की यदि समस्या है तो इसके पंचांग को पीस लें और उसके बाद इसे उबाल लें। फिर इसके उबले हुए जल से घाव को धोएं। इसके बाद साफ कपड़े से घाव को साफ कर लें और सुखा लें। एक कपड़े में कनेर का तेल चुपड़ दें और उस घाव पर इसकी पट्टी लगा दें। महीनों तक ऐसा करते रहने से आराम मिल जाता है।

कनेर का तेल कैसे बनाएं?

कनेर का तेल तैयार करने के लिए 250 ग्राम सरसों का तेल, एक किलो कनेर के पंचांग का काढ़ा और 100 ग्राम कनेर की जड़ की छाल की चटनी लें। इन्हें एक कढ़ाही में पका लें। पानी खत्म होने के बाद जो तेल बच जाता है, उसे ही आपको छानकर उपयोग में लाना है।

(3) कनेर से बवासीर का रामबाण आयुर्वेदिक इलाज

बवासीर (Hemorrhoids) में यदि मस्से में सूजन आ गई हो या फिर टीस हो तो आपको कनेर की जड़ की छाल को उसी तरह से घिसकर लेप करना है, जैसे कि चंदन का करते हैं। इससे आराम मिल जायेगा।

(4) कनेर से फोड़े फुंसी का घरेलू उपचार

जहरीले फोड़े (Toxic boils) में कनेर के पंचांग के उबले जल से घाव को धोकर पोछ लें। इस पर कनेर के तेल में डूबी हुई कपड़े की पट्टी लगा दें। एक सप्ताह तक ऐसा करेंगे तो लाभ दिखने शुरू हो जाएंगे। वैसे, घाव को सुखाने और भरने वाली दवा भी साथ में लेते हैं तो आराम और जल्दी मिलेगा।

(5) त्वचा के लिए सफेद कनेर के उपयोग

सफेद कनेर के फूल (white oleander) को पीसकर चेहरे पर लगाने से इससे न केवल त्वचा (skin) की रंगत में निखार आता है, बल्कि चेहरे में कमाल की चमक भी आ जाती है।

क्या कनेर का पौधा जहरीला होता है?

कनेर का औषधीय उपयोग करते समय यह बात अवश्य ध्यान में रखें कि यह बेहद जहरीला होता है। इतना जहरीला कि यदि इंसान इसके फूलों पर बैठने वाली मधुमक्खियों से बनी शहद भी खा ले तो बीमार पड़ गए। दरअसल, कनेर का जहर डाइगाक्सीन ड्रग की तरह है, जो दिल की धड़कन की रफ्तार कम कर देता है। आपको जानकर हैरानी हो सकती है कि कनेर के एक बीज का असर डाइगाक्सीन के सौ टैबलेट के बराबर होता है। इस कारण पहले तो यह दिल की धड़कनों को धीमा करता है और फिर एकदम से रोक दोता है। यानी कनेर से मौत भी हो सकती है, यदि समझ-बूझकर इसका उपयोग नहीं किया जाए। इसलिए कनेर के किसी भी अवयव को अपने मन से रोगों के उपचार के लिए उपयोग में नहीं लाएं। यानी इसका उपयोग करने से पहले अपने वैद्य या डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस वेबसाइट पर स्वास्थ्य से संबंधित सभी सामग्रियां केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए प्रकाशित की गई हैं और ये पेशेवर चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं हैं। इसलिए अपने स्वास्थ्य या किसी मेडिकल कंडीशन के बारे में यदि आपके मन में कोई सवाल हैं, तो हमेशा किसी योग्य चिकित्सक या अन्य योग्य स्वास्थ्य पेशेवर का मार्गदर्शन लें। यदि आपको लगता है कि आपको कोई मेडिकल इमरजेंसी हो सकती है, तो तुरंत अपने डॉक्टर अथवा आपातकालीन सेवाओं को कॉल करें, या फिर अपने नजदीकी अस्पताल के आपातकालीन विभाग में जाएं। कृपया यह भी ध्यान रखें कि विज्ञापनों में अथवा बाहरी लिंक के सहारे इस वेबसाइट से बाहर ले जाने अन्य वेबसाइटों पर किए गए दावों के लिए तनमन.ओआरजी की टीम ज़िम्मेदार नहीं है।



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