भस्त्रिका प्राणायाम से मज़बूत बनते हैं फेफड़े, लेकिन इसे करते समय बरतें ये 21 सावधानियां
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Benefits and precautions of Bhastrika Pranayama

कोरोनावायरस (Coronavirus) ने पूरी दुनिया को बताया कि अपने फेफड़ों (lungs) को स्वस्थ बनाये रखना, अपने शरीर की श्वसन प्रणाली को सुचारु बनाये रखना और अपनी इम्युनिटी को बेहतर बनाये रखना कितना ज़रूरी है। इस लिहाज से भस्त्रिका प्राणायाम आपके लिए बड़ा ही मददगार साबित हो सकता है।

क्यों करना चाहिए भस्त्रिका प्रणायाम? (Why to practice Bhastrika Pranayama)

  • शरीर को सकारात्मक ऊर्जा (positive energy) देने के लिए यह जरूरी है।
  • दिल और दिमाग तक इससे पर्याप्त मात्रा में oxygen पहुंच पाता है, जिससे आपकी आयु लंबी होती है।
  • जल और भोजन में मौजूद लाभकारी तत्वों का लाभ इससे आपको मिल पाता है।

कैसे करें भस्त्रिका प्राणायाम? (How to practice Bhastrika Pranayama)

Step 1

  • ऐसी जगह बैठें जहां शांति हो।
  • पद्मासन, वज्रासन, सिद्धासन या फिर किसी भी आरामदायक आसन में बैठें।
  • हाथों को ज्ञान मुद्रा में रख लें।
  • आंखें बंद कर लें।

Step 2

  • सांस अब तेजी से लें।
  • तेज गति से ही सांस को बाहर भी निकालें।
  • पेट सांस लेते समय फूलता रहे।
  • सांस निकालते समय पेट पिचकता रहे। नाभि स्थल पर दबाव बनना चाहिए।

Step 3

  • पहले तो दो सेकेंड में एक बार सांस लें और दो सेकेंड में ही छोड़ें।
  • फिर एक सेकेंड में एक बार सांस लें और एक सेकेंड में ही छोड़ें।
  • अब एक सेकेंड में दो बार सांस लें और दो बार निकालें।

Step 4

  • इसे समाप्त करते वक्त एक गहरी सांस लें।
  • अब इसे धीरे-धीरे निकाल दें।
  • शरीर को एकदम लचीला छोड़ दें।

भस्त्रिका प्राणायाम के दौरान बरतें ये 21 सावधानियां (21 Precautions to be taken during Bhastrika Pranayama)

  1. भस्त्रिका प्राणायाम हमेशा खाली पेट (empty stomach) ही करना चाहिए।
  2. दिन में केवल एक बार सुबह के वक्त करें।
  3. नाक बंद होने पर न करें।
  4. जितनी क्षमता हो उतना ही करें।
  5. हाल ही में कोई सर्जरी हुई हो तो न करें।
  6. दमा होने पर न करें।
  7. बुखार होने पर न करें।
  8. उच्च रक्तचाप (high blood pressure) से पीड़ित होने पर न करें।
  9. हृदय से संबंधित समस्याओं से पीड़ित हों तो न करें।
  10. शरीर को भस्त्रिका प्राणायाम करते वक्त झटका न दें।
  11. शरीर को हिलाने से भी बचें।
  12. तेज सांस लेने में दिक्कत हो तो धीरे-धीरे करें।
  13. गर्भवती महिलाएं (pregnant women) भस्त्रिका प्राणायाम न करें।
  14. टीबी (TB) या अल्सर की समस्या हो तो न करें।
  15. स्ट्रोक (stroke) वाले न करें।
  16. मिर्गी के मरीज भी इसे न करें।
  17. फेफड़े या गले में कोई समस्या होने पर इसे न करें।
  18. पसीना आने पर न करें।
  19. उल्टी होने पर न करें।
  20. चक्कर आये तो भस्त्रिका प्राणायाम रोक दें।
  21. घबराहट लगे तो न करें।

भस्त्रिका प्रणायाम से होते हैं ये 21लाभ (21 Benefits of Bhastrika Pranayama)

  1. सांस से संबंधित परेशानियां दूर होती हैं।
  2. दमा नहीं होता है।
  3. टीबी नहीं होता है।
  4. खांसी (Cough) में लाभ मिलता है।
  5. वात, पित्त और कफ के दोष से निजात मिलती है।
  6. दूषित पदार्थ शरीर के सभी अंगों से दूर होते हैं।
  7. नाड़ी रुकी होती है तो खुल जाती है।
  8. रक्त नालिकाओं को शुद्ध व मजबूत बनाये रखता है।
  9. पाचन शक्ति मजबूत बनती है।
  10. लीवर (Liver) का अच्छा व्यायाम हो जाता है।
  11. किडनी (Kidney) ठीक तरीके से काम करती है।
  12. मस्तिष्क (Mind) से संबंधित विकारों को दूर करता है।
  13. एकाग्रता (Concentration) बढ़ती है।
  14. तनाव (Tension) दूर होता है।
  15. इच्छा शक्ति प्रबल होती है।
  16. मन स्थिर होता है।
  17. आंख, कान और नाक बेहतर तरीके से काम करते हैं।
  18. आंखों की रोशनी बढ़ती है।
  19. हकलाने की समस्या दूर होती है।
  20. मोटापा दूर होता है।
  21. आयु लंबी होती है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

इस वेबसाइट पर प्रकाशित स्वास्थ्य संबंधी जानकारियां केवल सूचनात्मक उद्देश्य के लिए हैं और ये पेशेवर चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं हैं। यदि आप किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हैं या ऐसी किसी समस्या का आपको संदेह है, तो अपने पारिवारिक चिकित्सक या अन्य उपयुक्त चिकित्सक से परामर्श करें। यदि आप किसी हेल्थ इमरजेंसी का सामना कर रहे हैं या इसका आपको संदेह है, तो कृपया अपने नजदीकी अस्पताल के आपातकालीन विभाग में जाएं।



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