ऑस्ट्रेलिया में लॉकडाउन के दौरान बढ़ी ‘सुरक्षित फोन’ की मांग, शर्मनाक है वजह
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कोरोना क्विक अपडेट

  • स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में अब तक कोरोना के 62,25,763 केस कन्फर्म हो चुके हैं, जिनमें 9,40,441 एक्टिव केस हैं, 51,87,825  लोग ठीक हो चुके हैं और 97,497 की मृत्यु हो चुकी है।
  • वेबसाइट वर्ल्डमीटर्स.इनफो के मुताबिक, भारत कुल केस और एक्टिव केस दोनों के लिहाज से अमेरिका के बाद दुनिया में दूसरे स्थान पर है, जबकि मृत्यु के मामले में अमेरका और ब्राजील के बाद तीसरे स्थान पर है।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के मुताबिक, कोरोना से पूरी दुनिया के 235 देशों और इलाकों में अब तक 3,32,49,563 लोग संक्रमित हुए हैं और 10,00,040 लोग दम तोड़ चुके हैं।
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Austraila Corona virus lockdown pushesh ‘safe phones’ demand for women

कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए जहां भारत में 21 दिनों का लॉकडाउन चल रहा है, वहीं अन्य कई देशों ने भी अपने यहां लॉक डाउन किया हुआ है। ऑस्ट्रेलिया भी इन्हीं में से एक है। ऑस्ट्रेलिया में इन दिनों जब लॉकडाउन की स्थिति बनी हुई है तो ऐसे में यहां वर्तमान में सुरक्षित फोन (Safe Phones) की डिमांड बहुत ही बढ़ गई है।

क्या है सुरक्षित फोन?

ऑस्ट्रेलिया में सुरक्षित फोन नामक एक योजना चलाई जाती है, जिसके तहत यहां महिलाओं को सुरक्षित फोन दिए जाते हैं, ताकि वे उनके साथ होने वाली घरेलू हिंसा की शिकायत आसानी से कर सकें। सरकार की ओर से पोषित योजना के तहत सुरक्षित फोन की मांग इस लॉकडाउन के दौरान इसलिए बढ़ गई है, क्योंकि सभी महिलाएं इस वक्त अपने उन पार्टनर के साथ घरों में कैद होने को मजबूर हो गई हैं, जिनसे वे प्रायः प्रताड़ना और घरेलू हिंसा का शिकार होती हैं।

इसी हफ्ते हुआ लॉकडाउन

अब जब पूरी दुनिया में कोरोना वायरस का संक्रमण लगभग फैल चुका है और इसकी वजह से मौतों के आंकड़े बेतहाशा बढ़ते जा रहे हैं, तो इसे देखते हुए ऑस्ट्रेलिया ने भी अपने यहां पूरी तरह से लॉकडाउन कर रखा है। इसी हफ्ते ऑस्ट्रेलियाई सरकार की ओर से यह कदम उठाया गया है।

घरेलू हिंसा की शर्मनाक स्थिति

  • ऑस्ट्रेलिया में मानवाधिकार समूहों का कहना है कि कोरोना वायरस के संक्रमण से लड़ने के लिए उठाए गए लॉकडाउन के कदम के दौरान महिलाएं घरेलू हिंसा का बड़े पैमाने पर शिकार हो सकती हैं।
  • दरअसल मानवाधिकार समूह इसलिए भी ऐसा कह रहे हैं, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, यहां हर 6 में से एक महिला घरेलू हिंसा की शिकार है।
  • ऑस्ट्रेलिया में एक योजना चलाई जाती है, जिसके अंतर्गत यहां उन महिलाओं को सुरक्षित फोन प्रदान किए जाते हैं जो घरेलू हिंसा का शिकार होती हैं।
  • इस बारे में एक चैरिटी संगठन की ओर से बताया गया है कि पिछले कुछ समय में कई इलाकों में सुरक्षित फोन की डिमांड में तेजी आई है। कई इलाकों में तो मांग पहले से दोगुनी हो गई है।

मांग में आई जबरदस्त उछाल

  • ऑस्ट्रेलियाई महिला सर्विस नेटवर्क के राष्ट्रीय निदेशक करेन बेंटली के हवाले से बताया गया है कि हमारे पास अधिक संख्या में सुरक्षित फोन भेजे जाने की डिमांड आ रही है।
  • ऑस्ट्रेलियाई महिला सर्विस नेटवर्क की ओर से पूरे ऑस्ट्रेलिया में लगभग 300 सहायता समूहों को सुरक्षित फोन भेजे जाते हैं, जिनके माध्यम से जरूरतमंद महिलाओं तक इन्हें पहुंचाया जाता है।
  • बेंटली का कहना है कि वर्तमान परिस्थिति में महिलाओं को कई तरीके से घरेलू हिंसा का शिकार होना पड़ सकता है। उनके पार्टनर इसके लिए कई तरह के तरीके अपना सकते हैं, जिनमें से एक इन महिलाओं को वायरस के संक्रमण का शिकार बनाना भी हो सकता है।
  • वर्ष 2015 से ऑस्ट्रेलिया में इस योजना का संचालन यहां के सबसे बड़े टेलीकॉम नेटवर्क टेस्त्रा (Telstra) की मदद से किया जा रहा है। अब तक यहां 21 हजार ऐसे फोन दिए जा चुके हैं। वर्तमान में औसतन 600 फोन प्रति महीने दिए जा रहे हैं।
  • बेंटली के मुताबिक सुरक्षित फोन का इस्तेमाल करते हुए महिलाएं बेहद सुरक्षित तरीके से उनके साथ हो रही घरेलू हिंसा के मामलों को रिपोर्ट कर सकती हैं और उन्हें तत्काल सहायता भी मुहैया कराई जाती है।

न्यूजीलैंड में भी शर्मनाक हालत

न्यूजीलैंड में भी जहां एक महीने के लिए लॉकडाउन किया गया है, यह एक ऐसा विकसित देश है जहां 2018 की एक सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक हर 4 मिनट में एक महिला घरेलू हिंसा की शिकार होती है। ऐसे में लॉकडाउन के दौरान पुलिस इन महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करने के लिए लगातार अभियान भी चला रही है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

इस वेबसाइट पर प्रकाशित स्वास्थ्य संबंधी जानकारियां केवल सूचनात्मक उद्देश्य के लिए हैं और ये पेशेवर चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं हैं। यदि आप किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हैं या ऐसी किसी समस्या का आपको संदेह है, तो अपने पारिवारिक चिकित्सक या अन्य उपयुक्त चिकित्सक से परामर्श करें। यदि आप किसी हेल्थ इमरजेंसी का सामना कर रहे हैं या इसका आपको संदेह है, तो कृपया अपने नजदीकी अस्पताल के आपातकालीन विभाग में जाएं।



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