हल्के में न लें ब्रेन ट्यूमर के खतरे को, जानिए इसके कारण, लक्षण, प्रकार और उपचार
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Continuous headache could lead to brain tumor

अधिकतर लोगों को जब सिर में दर्द होता है तो वे इस पर ज्यादा ध्यान नहीं देते। या तो वे पेन किलर खा लेते हैं या फिर बाम लगा लेते हैं। लोग यह नहीं समझ पाते कि यह ब्रेन ट्यूमर जैसी गंभीर बीमारी का लक्षण भी हो सकता है।

दरअसल ब्रेन ट्यूमर एक ऐसी बीमारी है जिसे साइलेंट किलर (silent killer) के नाम से भी जानते हैं। इसकी वजह यही है कि आसानी से इसका पता नहीं चल पाता है। जब कई साल बीत जाते हैं तब पता लगता है कि ब्रेन ट्यूमर हो गया है। इसलिए यदि सिर में लगातार तेज दर्द (headache) हो रहा है तो उसे नजरअंदाज ना करके इसकी पूरी जांच करानी चाहिए। यहां हम आपको ब्रेन ट्यूमर के बारे में हर तरह की जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं।

आखिर क्या है ब्रेन ट्यूमर? (What is Brain Tumor)

  • दरअसल आपके ब्रेन में जब किसी तरह की गांठ बन जाती है तो उसके कारण इसके आसपास के इलाके में सूजन हो जाता है। इसकी वजह से दर्द होने लगता है। इसे ही ब्रेन ट्यूमर कहते हैं।
  • वैज्ञानिक भाषा में ब्रेन ट्यूमर को इंट्रा क्राल स्पेस ऑक्युपाइंग लेजन (Intra Ceawl Space Occupying Lesion) या फिर ICSOL के नाम से जानते हैं। नर्वस टिश्यू ब्रेन ट्यूमर को बनाते हैं, जो कि केवल ब्रेन में ही पाए जाते हैं। ब्रेन के स्कल पर इन गांठों की वजह से दबाव पड़ने लगता है। जिस क्षेत्र में यह दबाव पड़ता है, वहां ब्रेन की कार्यप्रणाली में बाधा उत्पन्न होने लगती है। इसके कारण मरीज के सिर में दर्द होने लगता है।
  • साथ ही उसे चक्कर आने की भी समस्या होने लगती है, क्योंकि जो गांठ बनती है, वह दरअसल जेनेटिक सिस्टम (genetic system) की वजह से बनती है। इसमें एक सिस्टम होता है, जिसमें कि पुरानी कोशिकाएं लगातार टूटती रहती हैं और इतनी ही संख्या में नई कोशिकाएं भी विकसित होती हैं।
  • ब्रेन में भी कोई ना कोई कोशिका हर दिन खराब होती रहती है और यह नष्ट भी होती रहती हैं। इसकी जगह नई कोशिकाएं बनती रहती है। जब जेनेटिक सिस्टम में किसी तरह की दिक्कत आ जाती है तो ऐसे में इन कोशिकाओं (cells) के विकास पर ब्रेन का नियंत्रण खत्म हो जाता है।
  • ऐसे में आम कोशिकाओं के मुकाबले नई कोशिकाएं ज्यादा तेजी से विकसित होने लगती हैं और पुरानी कोशिकाएं खत्म नहीं हो पातीं। ऐसे में ये कोशिकाएं जमा होकर गांठ का रूप ले लेती हैं, जिसे कि ट्यूमर कहते हैं। जैसे-जैसे समय बीतता है, यह बढ़ता चला जाता है।

ब्रेन ट्यूमर के प्रकार  (Types of Brain Tumor)

  • ब्रेन ट्यूमर आमतौर पर दो प्रकार के होते हैं। पहला होता है बिनाइन (binanin) और दूसरा मेलिग्नेंट (malignant)। बिनाइन नॉन कैंसर ट्यूमर होते हैं। इनका विकास बहुत धीमी गति से होता है। ब्रेन के दूसरे हिस्से में इनका फैलाव नहीं होता है। दवाइयां देकर या फिर सर्जरी करके इसे निकाला जा सकता है। साथ ही दोबारा इसके पनपने की आशंका कम ही होती है।
  • वहीं दूसरी ओर मेलिग्नेंट ब्रेन ट्यूमर एक तरह का कैंसर वाला टयूमर होता है, जिसकी कोशिकाएं बहुत तेजी से फैलती हैं। बहुत जल्द ये ब्रेन के बाकी हिस्सों और रीढ़ की हड्डी तक भी फैल जाती हैं। सबसे चिंता की बात यह है कि सर्जरी होने के बाद भी इसके दोबारा पनपने की आशंका बनी रहती है।

ब्रेन ट्यूमर के लक्षण

  • सुबह के वक्त में ज्यादा सिरदर्द होना। इसके बाद भी रुक-रुक कर दर्द होते रहना।
  • सुबह उठने के बाद जी मिचलाना। कमजोरी का अनुभव होना (weakness) और उल्टियां आना।
  • चलते समय लड़खड़ाहट होना। संतुलन बनाने में शरीर को दिक्कत होना।
  • बार-बार चक्कर आना। हाथ-पैर में अचानक कुछ भी महसूस नहीं होना। हाथ और पैर की मांसपेशियों में ऐंठन होना।
  • कलर ब्लाइंडनेस (colour blindness) होना।
  • कान में हमेशा कुछ आवाज सुनाई देना। स्वभाव में चिड़चिड़ापन आना।
  • उदासी का अनुभव करना।
  • दौरा पड़ना और बेहोश भी हो जाना।
  • कम या धुंधला दिखना।
  • छोटे बच्चों का ब्रेस्टफीड ना कर पाना और उसका कुछ नहीं खाना-पीना। लगातार रोना और उल्टी करना।

इन्हें सबसे ज्यादा खतरा (These people are at higher risk)

  • ब्रेन ट्यूमर का सबसे अधिक खतरा 15 साल तक के बच्चों को और 50 साल की उम्र पार कर चुके लोगों को होता है। भारत में प्रति एक लाख की आबादी में 8 से 10 लोग ब्रेन ट्यूमर की चपेट में आते हैं।
  • ब्रेन ट्यूमर आखिर क्यों होता है, इसे लेकर शोध चल रहा है। हालांकि अब तक रेडिएशन (radiation) के संपर्क में रहने को ब्रेन ट्यूमर की सबसे बड़ी वजह माना गया है। यदि किसी को कैंसर के कारण रेडिएशन थेरेपी दी जा रही है तो संभव है कि उसमें ब्रेन ट्यूमर भी आ जाए।
  • यदि शरीर के किसी अंग में कैंसर हुआ है तो संभव है कि ब्रेन की कोशिकाएं भी इससे प्रभावित हो सकती हैं। इसके कारण ब्रेन में मल्टीपल ट्यूमर होने का खतरा बढ़ जाता है।
  • इसके अलावा ब्रेन में यदि किसी तरह की सर्जरी हुई है तो ऐसे में उस दौरान क्षतिग्रस्त हुई (damaged) कोशिकाएं भी भविष्य में ट्यूमर का रूप ले सकती हैं।
  • ब्रेन ट्यूमर के लिए सर्वाधिक जिम्मेदार मोबाइल फोन के अधिक इस्तेमाल को माना गया है, क्योंकि इससे निकलने वाली किरणें कोशिकाओं को बुरी तरह से प्रभावित करती हैं और धीरे-धीरे यही ट्यूमर का रूप ले लेती हैं।
  • साथ में आसपास के वातावरण में मौजूद वायरस और खाने-पीने की सामग्री में प्रयोग में आने वाले रसायनों की वजह से भी ब्रेन ट्यूमर हो सकता है।
  • यह जेनेटिक भी कई बार होता है, लेकिन इसका अंदेशा बहुत कम होता है। माता-पिता में से यदि किसी को ब्रेन कैंसर हुआ है तो बच्चों में ब्रेन ट्यूमर की आशंका केवल 5 फ़ीसदी होती है।

ब्रेन ट्यूमर का इलाज (Treatment of Brain Tumor)

  • ब्रेन ट्यूमर का इलाज केवल तीन ही तरह से किया जा सकता है। एक है सर्जरी। दूसरी रेडियोथेरेपी और तीसरी कीमोथेरेपी। डॉक्टर जांच के बाद यह निर्णय लेते हैं कि इलाज के लिए इनमें से किसका इस्तेमाल किया जाएगा।
  • ब्रेन ट्यूमर को हटाने के लिए डॉक्टर माइक्रोस्कोपिक सर्जरी का सहारा लेते हैं, जिसमें कि ब्रेन के हिस्से और ट्यूमर 10 गुना बड़ा करके देखे जाते हैं। इससे ब्रेन के दूसरे हिस्से को बिना कोई नुकसान पहुंचाए ट्यूमर को आराम से निकाल लिया जाता है।
  • सर्जरी करके जब ट्यूमर को रिमूव कर दिया जाता है तो उसके बाद इसे जांच के लिए पैथोलॉजी लैब में भेज दिया जाता है। आगे का इलाज इसके ग्रेड के अनुसार होता है। यदि मेलिग्नेंट टयूमर होता है तो सर्जरी के बाद भी रेडिएशन और कीमोथेरेपी कराने की सलाह डॉक्टर देते हैं।

अस्वीकरण (Disclaimer):

इस वेबसाइट पर प्रकाशित स्वास्थ्य संबंधी जानकारियां केवल सूचनात्मक उद्देश्य के लिए हैं और ये पेशेवर चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं हैं। यदि आप किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हैं या ऐसी किसी समस्या का आपको संदेह है, तो अपने पारिवारिक चिकित्सक या अन्य उपयुक्त चिकित्सक से परामर्श करें। यदि आप किसी हेल्थ इमरजेंसी का सामना कर रहे हैं या इसका आपको संदेह है, तो कृपया अपने नजदीकी अस्पताल के आपातकालीन विभाग में जाएं।



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