भूल से भी न करें आंखों की सूजन की अनदेखी, वरना छिन सकती है रोशनी
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Ignoring swelling in eyes could result in suffering from this dangerous disease

कई बार ऐसा होता है कि आपको नजरों के सामने चीजें चलती हुई दिखाई देती हैं। ऐसा भी कई बार होता है कि आंखों के सामने अचानक से अंधेरा छा (black out) जाता है। प्रायः लोगों को लगता है कि आंखों की थकान की वजह से ऐसा हो रहा है और इस वजह से वे इन चीजों को नजरअंदाज कर देते हैं, मगर ये सभी लक्षण आंखों की सूजन के भी हो सकते हैं, जिसे मेडिकल भाषा में मैक्युलर इडिमा (macular edema) भी कहा जाता है। यह बीमारी बेहद खतरनाक होती है और अंधा (blindness) तक बना सकती है। यहां हम आपको इसी बीमारी और इसके उपचार के बारे में जानकारी दे रहे हैं।

इसे कहते हैं मैक्युलर इडिमा (What is Macular Edema)

  • आंखों के रेटिना में जो बीच का हिस्सा होता है, उसे मैक्युला (Macula) कहा जाता है।
  • बहुत सी कोशिकाओं की बेहद संवेदनशील परतों से रेटिना बनता है।
  • रेंटिना (retina) के पीछे की ओर मैक्युलर होता है।
  • मैक्युलर से दूर की चीजों को देखने और रंगों को पहचानने में मदद मिलती है।
  • इसी रेटिना में किसी वजह से द्रव (fluid) जमा होने लगता है।
  • ऐसे में आंखों के पर्दे सूज जाते हैं।
  • यह एक बीमारी है, जिसे मैक्युलर इडिमा के नाम से जानते हैं।

इसलिए खतरनाक है मैक्युलर इडिमा (This is why the Macular edema is so dangerous)

  • इसकी चपेट में आने से देखने में दिक्कत होने लगती है।
  • आखों में दर्द (pain in eyes) भी बहुत होता है।
  • आंखों का सूजन बढ़ने लगता है।
  • इलाज बहुत जल्द होना जरूरी है, अन्यथा अंधे होने का खतरा बढ़ जाता है।
  • इसके लक्षण दिख जाएं, तो बिना देरी के डाॅक्टरों (doctor) से संपर्क करना चाहिए।

मैक्युलर इडिमा के लक्षण (Symptoms of Macular Edema)

  • आंखों के सामने अंधेरा छाना।
  • चीजें धुंधली (blur) नजर आने लगना।
  • हिलती-डुलती दिखने लगती हैं चीजें।
  • सही रंग (color) नहीं आता नजर।
  • पढ़ने में दिक्कत होती है।
  • तेज रोशनी के प्रति बेहद संवेदनशील हो जाते हैं आखों के पर्दे।
  • नजरें टेढ़ी हो जाती हैं। सीधी चीजें भी टेढ़ी नजर आती हैं।

इन्हें सर्वाधिक खतरा (These people are at risk)

  • यह किसी भी उम्र में हो सकता है।
  • डायबिटीज (diabetes) के मरीजों को इसका खतरा अधिक होता है।
  • बढ़ती उम्र के कारण भी यह होता है।
  • अनुवांशिक (genetic) कारणों से।
  • दवाओं के साइड इफैक्ट (side affects) की वजह से।
  • जिन्हें आंखों में कोई गंभीर चोट आई हो।
  • जिन्हें रक्त वाहिनियों से संबंधित कोई रोग हो।
  • आंखों में जिन्हें ट्यूमर (tumor) हो गया हो।
  • जिनके मैक्युला में छेद हुआ हो।
  • मोतियाबिंद, रेटिना या फिर ग्लूकोमा से संबंधित सर्जरी कराने वालों में।
  • रेटिना की बेहद सूक्ष्म शिराओं में रेडिएशन के कारण यदि अवरोध पैदा हो।

मैक्युलर इडिमा का उपचार (Treatments for Macular Edema)

  • डाॅक्टर से बिना देर किये दिखाना चाहिए।
  • बीमारी की पुष्टि हो जाए तो तरल का जो रिसाव है, उसे कम किया जा सकता है।
  • दवाओं के साथ लेजर और सर्जरी (surgery) आदि की भी जरूरत पड़ती है।
  • इसके उपचार में सबसे ज्यादा प्रचलन में इंट्राविट्रियल इंजेक्शन (IVI) हैं।
  • एक ही जगह पर इसके होने की स्थिति में फोकल लेजर से इसका इलाज किया जा सकता है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

इस वेबसाइट पर प्रकाशित स्वास्थ्य संबंधी जानकारियां केवल सूचनात्मक उद्देश्य के लिए हैं और ये पेशेवर चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं हैं। यदि आप किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हैं या ऐसी किसी समस्या का आपको संदेह है, तो अपने पारिवारिक चिकित्सक या अन्य उपयुक्त चिकित्सक से परामर्श करें। यदि आप किसी हेल्थ इमरजेंसी का सामना कर रहे हैं या इसका आपको संदेह है, तो कृपया अपने नजदीकी अस्पताल के आपातकालीन विभाग में जाएं।

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