नवजात शिशु की देखभाल के लिए हमेशा याद रखें ये 6 महत्वपूर्ण बातें
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Top 6 things to keep in mind for newborn care

माँ बनना हर महिला के लिए गर्व की बात होती है। किसी भी महिला और उसके बच्चे का रिश्ता बहुत ही अनमोल होता है। जन्म लेते ही शिशु को सबसे पहले उसकी माँ की गोद का एहसास होता है। यदि यह आपका पहला बच्चा है, तो आपको चिंता हो सकती है कि आप नवजात शिशु की देखभाल कैसे करेंगी। आपके लिए ये जानना बेहद जरूरी है कि आप अपनी नवजात शिशु की देखभाल कैसे करें और कौन-कौन सी सावधानी रखें।

तो आज हम अपने इस लेख के माध्यम से आपको अपने नवजात शिशु की देखभाल करने के कुछ महत्वपूर्ण उपाय बताएंगे, जो निश्चित तौर पर आपके लिए काफी मददगार होंगे:

(1) बच्चे को कराएं समय पर फीडिंग

एक स्वस्थ बच्चे के लिए उसको समय पर दूध पिलाना बहुत जरूरी है। माँ को अपने नवजात शिशु को हर 2 घंटे के अंतराल के बाद फीडिंग जरूर करानी चाहिए। साथ ही उसे ये भी ध्यान रखना चाहिए कि नवजात शिशु को पहले 6 महीनों तक केवल माँ का दूध ही मिले, क्यूंकि माँ का दूध एक नवजात बच्चे के लिए सर्वोत्तम आहार होता है। माँ के दूध में महत्वपूर्ण सभी प्रकार के पोषक तत्व और एंटीबॉडी होते हैं, जो बच्चे के सम्पूर्ण विकास के लिए आवश्यक होते हैं। कम से कम 10 मिनट तक बच्चे को दूध पिलाएं। दूध पिलाने के बाद बच्चे को डकार अवश्य दिलाएं। इस क्रिया को बर्पिंग कहते हैं, जो पाचन क्रिया में सहायता करता है, जिससे बच्चो को पेट दर्द और कोलिक जैसी समस्या नहीं होती।

(2) सही तरीके से गोद में उठाएं

नवजात शिशु बहुत ही ज्यादा नाजुक होता है अतः उसे गोद में बहुत ही सावधानी से उठाना चाहिए। ध्यान रहे अपने नवजात शिशु को उठाते समय अपना एक हाथ उसके गर्दन और सिर के नीचे सावधानी पूर्वक रखें और अपना दूसरा हाथ उसके कूल्हों के नीचे रखें। इस तरह से गोद लेने से उसके पूरे शरीर को आपका सहारा मिलेगा। क्यूँकि नवजात शिशुओं की गर्दन काफी कमजोर होती है और सर काफी भारी होता है। गर्दन, सिर के वजन को नहीं सम्हाल पाती, जिससे उसकी गर्दन में चोट आ सकती है। अतः नवजात शिशु को गोद में लेते वक्त इस बात का ध्यान जरूर रखें।

(3) गर्भनाल या एम्ब्लिकल कॉर्ड की केयर

नवजात शिशु के गर्भनाल स्टंप की देखभाल करना बहुत ही ज्यादा जरूरी होता है। जन्म के 2-3 हफ्तों तक नवजात बच्चे को सीधे पानी से स्नान कराने के बजाय उसे स्पॉन्ज बाथ दें। इसके लिए आप स्पॉन्ज या साफ मुलायम कपडे को गुनगुने पानी में निचोड़कर उसकी बॉडी पोछ दें। गर्भनाल वाले क्षेत्र को साफ और सूखा रखना काफी जरूरी होता है। गर्भनाल आसानी से सूखे इसके लिए बच्चे के डायपर को मोड़ कर रखें। अगर आप नाभि में लालिमा, सूजन, बदबूदार स्त्राव, रक्तस्त्राव या मवाद देखती हैं, तो बच्चे को तुरंत किसी अच्छे बाल रोग विशेषज्ञ के पास ले जाएं।

(4) मालिश करने में सावधानी बरतें

क्यूंकि बच्चा अभी बहुत कोमल है, इसलिए उसकी मालिश आपको बहुत ही ज्यादा सावधानीपूर्वक करनी चाहिए। मालिश नवजात शिशुओं के शारीरिक विकास के लिए बेहद जरूरी होती है, मालिश करने से उनकी हड्डियां मजबूत बनती हैं जिससे उनका शरीर स्ट्रांग होता है। बादाम का और जैतून का तेल मालिश के लिए सबसे उपयुक्त होता है। मालिश करने के लिए अपने हाथों पर थोड़ी मात्रा में ऑयल लगाएं और धीरे से उसके शरीर पर हाथ फेरें। उसके पैरों में, पीठ पर और हाथों में अच्छे से मालिश करें। मालिश करते समय ध्यान रहे कि आपके स्ट्रोक्स ऊपर से नीचे की तरफ हों, इससे रक्त का संचार शरीर में अच्छी तरह से होता है।

(5) पर्याप्त नींद है बेहद जरूरी

नवजात शिशुओं को शुरू के 2 महीनों में दिन में लगभग 16 घंटे सोना चाहिए। पर अगर आपका बच्चा ऐसा नहीं करता है, तो इस मामले में चिंता मत करें। हर बच्चा अलग होता है और साथ ही उसकी नींद का समय भी अलग होता है। कुछ बच्चे दिन में अधिक जागते और रात में सोते हैं तो कुछ बच्चे इसके विपरीत रात में जागते और दिन में सोते हैं। सोते समय बच्चे के सिर की स्थिति को बदलते रहना चाहिए। एक माँ को बच्चे के साथ खुद भी सोने की कोशिश करनी चाहिए।

(6) समय पर टीकाकरण कराना है बेहद जरूरी

अगर आप अपने बच्चे को विभिन्न प्रकार की गंभीर बीमारियों से दूर रखना चाहती हैं, तो उसे सही समय पर सभी टीके लगवा लें। आपको अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जाकर टीके के लिए रजिस्ट्रेशन करवाना चाहिए और बच्चे का समय पर टीकाकरण कराना चाहिए।

इन बातों का भी रखें ध्यान

  • बच्चों को हिलाएं नहीं और न ही उसे हवा में उछालें। क्यूंकि ऐसा करने से उसके मस्तिष्क में रक्तस्त्राव हो सकता है और उसकी जान भी जा सकती है।
  • अगर आपको अपना शिशु बीमार लग रहा है या सुस्त है तो तुरंत डॉक्टर की सहायता लें।
  • अपने नवजात शिशु को विभिन्न तरह के संक्रमणों से ग्रस्त लोगों या बच्चों से दूर रखें, क्यूंकि आपके बच्चे का प्रतिरक्षा तंत्र काफी कमजोर होता है और उसे संक्रमण का खतरा ज्यादा से ज्यादा रहता है।

इसके अतिरिक्त अपने शिशु के वजन और लम्बाई की नियमित जाँच करती रहें कि यह सही है या नहीं। जब भी कोई दिक्कत महसूस हो तो बिना किसी देरी के तुरंत उसे किसी अच्छे बाल रोग विशेषज्ञ के पास ले जाएं।

अस्वीकरण (Disclaimer):

इस वेबसाइट पर प्रकाशित स्वास्थ्य संबंधी जानकारियां केवल सूचनात्मक उद्देश्य के लिए हैं और ये पेशेवर चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं हैं। यदि आप किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हैं या ऐसी किसी समस्या का आपको संदेह है, तो अपने पारिवारिक चिकित्सक या अन्य उपयुक्त चिकित्सक से परामर्श करें। यदि आप किसी हेल्थ इमरजेंसी का सामना कर रहे हैं या इसका आपको संदेह है, तो कृपया अपने नजदीकी अस्पताल के आपातकालीन विभाग में जाएं।

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